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Showing posts from May, 2019

त्वचा और बालों को प्रदूषण से एेसे बचाएं

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अपनी त्वचा और बालों को प्रदूषण से सुरक्षित रखना बहुत जरूरी है। गर्मी हो या सर्दी, बसंत या मानसून, अपनी त्वचा और बालों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष देखभाल करनी चाहिए। आप चाहे घर के भीतर रहें या बाहर, शोर में रहें या वायु प्रदूषण में, अपनी त्वचा और बालों की खास देखभाल करें। एयर कंडीशनर, रेफ्रीजरेटर और माइक्रोवेव से निकलने वाले गैसें आपकी त्वचा और बालों के लिए नुकसानदायक होती हैं। आइये जानते हैं कुछ खास टिप्स... अपनी त्वचा और बालों की क्लेंजिंग, टोनिंग और माइश्चराइजिंग करें। बालों को पर्याप्त पोषण दें ताकि वे रूखे और बेजान न हो। बाहर जाते समय अपने बालों को प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष स्प्रे का इस्तेमाल करें। त्वचा पर भी सनस्क्रीन, एलो वेरा जैल या अन्य रक्षात्मक परत लगाएं। इससे आपकी त्वचा 6-7 घंटों के लिए प्रदूषण से सुरक्षित हो जाएगी है। नियमित रूप से स्क्रब का इस्तेमाल करें, त्वचा को कोमल और मुलायम बनाए रखने के लिए ग्लो पैक लगाएं। घर में बने पैक प्रदूषण से आपकी त्वचा को सुरक्षित रखने में बेहद कारगर हो सकते हैं।

ऐसे दूर करें दांतों का पीलापन, जानें ये खास टिप्स

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दिन में दो बार ब्रश और साफ-सफाई से दांत चमकदार व मजबूत बने रहते हैं। गुटखा, पान, तंबाकू, सिगरेट, शराब आदि दांतों की चमक खत्म करने के साथ इनकी जड़ों को भी कमजोर करते हैं। यदि आप दांतों के पीलेपन से परेशान हैं तो अपनाएं ये घरेलू नुस्खे... नीम नेचुरल एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुणों से भरपूर है। रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांत संबंधी रोग नहीं होते व पीलापन भी दूर हो जाता है। तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की क्षमता पाई जाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं। बेकिंग सोडा से पीले दांतों को सफेद बनाना अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली परत धीरे-धीरे साफ हो जाती है। संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। ब्रश करने के बाद इस पाउडर से दांतों पर हल्के से रोजाना मसाज करें। नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है व दांत चमकने लगते हैं।

गर्मियों में होने वाली त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए जानें ये खास घरेलू नुस्खे

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गर्मियों में धूप, धूल-मिट्टी, वातावरण में मौजूद जहरीली गैस, धुएं आदि से सबसे ज्यादा नुकसान त्वचा को होता है। ऐसे में चेहरे, पीठ, गले और हाथ-पैरों पर छोटी-छोटी फुंसियां, फोड़े व लाल चकत्ते होने लगते हैं। इनमें धीरे-धीरे जलन, खुजली व गंभीर अवस्था में दर्द भी होता है जिसके लिए कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर आराम पाया जा सकता है- 10 नीम के पत्ते, एक चम्मच हल्दी और दो चम्मच मुल्तानी मिट्टी को गुलाबजल में पीस लें। इस पेस्ट को फोड़े-फुंसी, खुजली पर लेप की तरह लगाएं, आराम मिलेगा। मंजीठ, नीम की पत्ती व छाल, हल्दी व लाल चंदन को समान मात्रा में लेकर पानी में घिस लें। लेप की तरह इसे प्रभावित हिस्से पर लगाएं। इसके अलावा इनके मिश्रण से तैयार पाउडर की 2-4 ग्राम की मात्रा को एक माह तक खा भी सकते हैं। त्वचा पर खुजली, जलन और रेशेज में लाभ होगा। कुछ आयुर्वेदिक औषधियां जैसे रसमाणिक्य, आरोग्यवर्धनी, पंचतिक्तघृत गुग्गुलू, पंच निंबादि चूर्ण, शुद्धगंधक, खदिरारिष्ट, सारिवाद्यासव, मंजिष्ठादि व त्रिफला चूर्ण, हरिद्राखंड आदि को विशेषज्ञ द्वारा बताई गई मात्रा में खाने की सलाह देते हैं। इसके अलावा त्वचा पर बाहरी रू...

आपकी डाइट में ही छिपा है खूबसूरती का राज, जानें ये खास बातें

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जीभ से लेकर गले तक महज कुछ सेकंड के स्वाद के लिए हम जंकफूड, तले-भुने या मिर्च-मसाले वाले फूड्स खाने से परहेज नहीं करते। लेकिन जैसे ही यह चीजें पाचनतंत्र में जाती हैं पेट को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती हैं। इन चीजों के अत्याधिक सेवन से ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और त्वचा संबंधी अनेक दिक्कतें सामने आने लगती हैं। ब्यूटी एक्सपर्ट के मुताबिक, आपकी खुराक यानी डाइट में ही खूबसूरती व सेहत का राज छिपा है। इसे सही तरीके से फॉलो किया जाए तो कोई भी जवां बना रह सकता है। जानते हैं किस तरह से डाइट, सही मेकअप और व्यायाम से हैल्दी स्किन पाई जा सकती है। डाइट की डोज - रोजाना कम से कम दो फल जरूर खाएं और 7-8 गिलास पानी पिएं। कम चीनी, कम नमक, कम तेल व अधिक फाइबर वाली चीजें जैसे मशरूम, मटर, पालक आदि को डाइट में शामिल करें। फलों का जूस पीने की बजाय उन्हें छिल्कों के साथ खाएं ताकि उनमें फाइबर बना रहे। यही फाइबर पाचनतंत्र को दुरुस्त रखेगा व त्वचा सेहतमंद रहेगी। रोजाना चार किशमश, पांच बादाम, एक अखरोट और एक चम्मच अलसी के बीज खाएं। मेकअप का मंत्र - सर्दी हो या गर्मी हमेशा सनस्क्रीन जरूर लगाएं। यह सुरक्ष...

गालों को फुलाने के आसान उपाय

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छोटा ओ बनाएं होठों को कुछ इस तरह गोल करें कि छोटा ओ बन जाए। अब ऐसे ही रखते हुए होठों को दाएं बाएं फैलाएं जैसे कि आप ओ बनाते हुए मुस्कुराना चाहते हैं। इसके बाद नॉर्मल हो जाएं और फिर से यही प्रक्रिया दोहराएं। ऐसा कम से कम दिन में दो बार 10-10 बार करें। जीभ बाहर निकालें सीधे खड़े होकर अपनी जीभ को मुंह से जितना ज्यादा बाहर निकाल सकते हैं, निकालिए। और फिर जीभ को 60 सेकंड तक बाहर ही रखें। इसके बाद नार्मल हो जाएं। ऐसा आप सुबह के समय पांच बार करें। मुस्कुराते रहें दिनभर काम करते हुए आप किसी से बात करना और मुस्कुराना भूल जाते हैं। ऐसे में चेहरे पर डलनेस आ जाती है। तो हर दो घंटे में आप एक छोटा सा ब्रेक ले और लोगों से बात करें, हंसी ठिठोली करें। इससे आप एक नई एनर्जी तो महसूस करेंगे ही, साथ ही आपके गालों में फुलावट भी आएगी। मछली जैसा मुंह बनाएं मछली जैसा मुंह बनाने के लिए आप अपने होठों को बंद रखते हुए फुल मुस्कुराएं। और फिर मुस्कुराते हुए ही गालों को अंदर की ओर खींचें। बन गया मछली जैसा मुंह और अब इस स्थिति में कुछ सेकेण्ड्स रहने के बाद नार्मल हो जाएं। यह आप 5 से 7 बार करें। गालों को फुलाए...

केसर में खुशबू के साथ औषधीय गुण भी हैं, जानें इसके फायदे

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खुशबूदार केसर स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है। औषधीय गुणों के अलावा त्वचा की केयर भी करती है इस लिए ये नेचुरल कॉस्मेटिक भी है। एक चिकित्सकीय शोध के अनुसार एंटी एमीलोईडोजेनिक गुणों के कारण केसर मेमोरी लॉस से बचाती है। अल्जाइमर की दवा डोनेपिजिल में इसीलिए केसर का उपयोग किया जाता है। केसर ट्यूमर की ग्रोथ रोकती है। यह शरीर में कार्सिनोजन तत्त्व को कम कर त्वचा कैंसर का जोखिम कम करता है। इसमें क्रोसेटिन है जो हार्ट को चुस्त-दुरुस्त रखता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल घटाती है और गुड कोलेस्ट्राल बढ़ाती है, जिससे रक्त संचार बेहतर होता है और हार्ट पूरी क्षमता से काम करता है। जर्नल आफ इनवेस्टिगेटिव ओपथेल्मोलॉजी एंड विजुअल साइंस के एक अध्ययन का निष्कर्ष है कि केसर में आक्सीडेंटिव क्षति से लडऩे की क्षमता है जिससे रेटिना की केयर होती है और दृष्टि में सुधार होता है। एनाल्जेसिक गुणों के कारण केसर पेटदर्द और एसिडिटी की परेशानियों से राहत प्रदान करती है। एंटी-टेम्पेनाइट खूबी के कारण यह आंतों में गैस नहीं बनने देती और पाचनतंत्र ठीक रखती है। केसर पेट की ऐंठन को रोकने में भी मददगार है।

इन फलों से स्किन को बनाएं हेल्दी और खूबसूरत

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चमकदार और खूबसूरत त्वचा के लिए फल फायदेमंद माने जाते हैं, क्योंकि इनसे स्किन को पोषण मिलता है। आइये जानते हैं कैसे- पपीता : यह खाने व स्किन पर लगाने से दोनों तरह से फायदा देता है। विटामिन-ई, ए व सी से युक्त पपीते में एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं। यह त्वचा को नमी देता है। इसमें में मौजूद पपेन तत्व स्किन की मृत कोशिकाओं को हटाता है। स्ट्रॉबेरी : स्किन चमकदार बनाने और आंखों के नीचे होने वाले काले घेरों को भी मिटाने मेंं मददगार है। सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों के नुकसान से यह बचाती है। साथ ही यह स्किन को ठंडा रखती है। तरबूज : गर्मी में आने वाला फल है तरबूज। इसमें मौजूद विटामिन-ई स्किन को चमकदार बनाने के साथ ही बॉडी को फिट रखता है। यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। नींबू : यह विटामिन-सी का खजाना है। नींबू पूरे शरीर के लिए तो फायदेमंद है साथ ही यह त्वचा में नमी बनाए रखता है। इसे डाइट में शामिल करने व त्वचा में लगाने से स्किन खूबसूरत होने के साथ यह क्लिंजर का काम भी करता है। सेब : इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स तत्व होते हैं जो कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है। यह स्किन को लचीला, नर्म...

मुल्तानी मिट्टी से कम होता है गर्मी का असर, जानें इसके अन्य फायदे

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गर्मियों के मौसम में मुलतानी मिट्टी का उपयोग ठंडक देता है। नीम की पत्तियों का पाउडर, नींबू का रस, दही, मेथी पाउडर, गुलाबजल, हल्दी व शहद के साथ या अकेले भी मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग करते है। आइये जानें इसके फायदे- दूर होंगी घमौरियां - अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर का तापमान बढ़ने से त्वचा पर छोटी-छोटी फुंसियां उभरने लगती हैं। थोड़े पानी या दूध में थोड़ी मुल्तानी मिट्टी के पाउडर को भिगोकर फुला लें। प्रभावित हिस्से पर सूखने तक पतले लेप के रूप में लगा लें। इससे घमौरियों में होने वाली जलन और खुजली नहीं होगी। ताजगी का अहसास - धूप में निकलने से आधा घंटा पहले मुल्तानी मिट्टी का लेप चेहरे, हाथ, गर्दन और पैरों पर लगाकर धो लें। इससे गर्मी का असर कम होने के साथ तरोताजा महसूस करेंगी। तैलीय त्वचा- कुछ लोगों को तैलीय त्वचा की समस्या होती है। ऐसे में धूप सामान्य से ज्यादा त्वचा पर असर करने लगती है। मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल को सोखकर चमक बढ़ाने और ताजगी का काम करती है। एक कटोरी मुल्तानी मिट्टी के पाउडर में एक चम्मच खीरे का पेस्ट, कच्चा दूध और दो चम्मच बेसन मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर...

बढ़ती उम्र के प्रभाव को कम करने के लिए जान लें हैल्दी टिप्स

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हर व्यक्ति अपनी उमर् से कम दिखाना चाहता है।लोग चाहते हैं कि वे हमेशा जवान दिखें उनकी त्वचा पर चमक दिखाई दे। जवान दिखने के लिए लोग कई तरह के उपचार करते हैं। उम्र बढ़ने के साथ त्वचा पर रिंकल्स, रूखापन, रैशेज होने लगते हैं इन बदलावों को चिकित्सक एजिंग इफेक्ट कहते हैं। इनसे बचने के लिए बोटॉक्स जैसे एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट उपलब्ध है, लेकिन इसके साइड इफेक्ट भी हैं। जानें क्या हैं एजिंग से बचने के हैल्दी टिप्स- हैल्दी डाइट, नियमित व्यायाम और योग के साथ पूरी नींद लें। रोज सुबह-शाम टहलें, साइक्लिंग, जॉगिंग और योग करें। स्वीमिंग सबसे अच्छा व्यायाम है, आउटडोर गेम में शामिल हों। ओट्स, व्हीट फ्लैक्स, स्प्राउट्स व पपीता, तरबूज जैसे फल खाएं। जूस, लस्सी, दूध, दही जैसी तरल डाइट, फल, सलाद आदि डाइट में शामिल करें। चाय-कॉफी कम लें। स्मोकिंग और तनाव से दूरी बनाएं। बॉडी और फेस मसाज करें। चेहरे की त्वचा को कांतिमय बनाए रखने के लिए प्राकृतिक फेस पैक का उपयोग करें।

थकी आंखों को आराम देने के लिए करें ये काम

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घर हो या दफ्तर कम्प्यूटर, मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का उपयोग बढ़ गया है। इनके साथ आंखों में सूजन, आंखों के नीचे काले घेरे और थकी-थकी आंखों की शिकायतें भी बढ़ने लगी हैं। लेकिन थोड़ी-सी सावधानी बरतकर इन परेशानियों से बच सकते हैं। अच्छे खानपान के साथ आंखों से जुड़ी एक्सरसाइज से आंखों की थकान दूर की जा सकती है। दोनों हाथों को रगड़कर बंद आंखों पर रखने से आंखों की थकान कम हो जाती है। आंखों को बंद कर गहरी सांस लें और रिलेक्स करें। आई बॉल्स को चारों दिशाओं में घुमाएं। ये आंखों की सरल व सहज एक्सरसाइज है जो कहीं भी और कभी भी की जा सकती है। दो चम्मचों को कुछ देर ठंडे पानी में रखें। इन चम्मचों को उल्टा करके आंखों पर एक मिनट के लिए रखें। चम्मचों से मिलने वाली ठंडक आंखों की थकान दूर कर देगी। एक कप ठंडे दूध में कॉटन बॉल्स डालें। लेटकर दूध में भीगी कॉटन बॉल्स को थोड़ा निचोड़कर 10-15 मिनट आंखों पर रखें। आंखों की थकान दूर होगी। नींद की कमी से आंखें सूज जाती हैं। 7-8 घंटे की नींद लें।

त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है कपूर

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त्वचा संबंधी समस्याओं में कपूर को नारियल तेल में मिलाकर चेहरे पर मसाज करना असरदार है। शरीर के किसी हिस्से में खरोंच, घाव या जलने पर कपूर को पानी में घोलकर प्रभावित स्थान पर लगाएं। यह जलन को कम कर ठंडक पहुंचाता है। पेटदर्द होने पर कपूर, अजवायन और पिपरमेंट को शर्बत में मिलाकर पीने से आराम मिलता है। सर्दी-जुकाम व फेफड़े संबंधी रोगों में कपूर सूंघने से फायदा होता है। फटी एड़ियों के उपचार के लिए कपूर बेहतरीन दवा है। गुनगुने पानी में कपूर मिलाएं। इस पानी में पैर डालकर 15 से 20 मिनट बैठने से फटी एड़ियों की समस्या मेंं आराम मिलता है। त्वचा पर लाल चकत्ते से राहत के लिए कपूर को थोड़े से पानी में मिलाकर पेस्ट बनाएं और प्रभावित हिस्से पर लगाएं। बालों के झड़ने पर कपूर के तेल को नारियल तेल में मिलाकर लगाने से बालों का झड़ना धीरे-धीरे कम हो जाता है। रूसी होने पर भी यह तेल कारगर है। जोड़ों में दर्द होने पर कपूर के तेल की मालिश राहत पहुंचाती है। यह गठिया के रोगियों के लिए भी फायदेमंद है साथ ही मांसपेशियों के दर्द से राहत देने में कारगर है।

जानिए आंखों के काले घेरे दूर करने के उपाय

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आंखों के आसपास काले घेरे चेहरे की सुंदरता खराब कर देते हैं और इससे उम्र भी ज्यादा दिखने लगती है। अगर आप ये काले घेरे खत्म करना चाहते हैं तो जरा सी कोशिश से इन्हें हटा सकते हैं। गर्मियों में समस्या और भी बढ़ जाती है- इन उपायों से काले घेरे दूर किए जा सकते हैं। सनग्लासेज : धूप से केवल त्वचा झुलसती ही नहीं होती, बल्कि आंखों के नीचे झुर्रियां भी पड़ने लगती हैं। सनग्लासेज इसमें काफी मददगार साबित होते हैं। एएचए क्रीम : एएचए यानी अल्फा हाइड्रॉक्सी एसिड क्रीम में फलों से निकाले गए एसिड होते हैं, जो त्वचा में कोलोजन तेजी से बनाकर झुर्रियां और कालापन बढ़ने से रोकते हैं। रोजाना रात को चेहरा साफ करने के बाद रिंग फिंगर में क्रीम लेकर आंखों के चारों तरफ गोलाई में मसाज करें। सूखी ब्रेड : इसे गुनगुने दूध में फुलाकर बादाम का तेल व ऐलोवेरा के पेस्ट में मिला लें। इस मिश्रण को कपड़े में लपेटें व बंद आंखों पर 15 मिनट तक रखें। हफ्ते में 3 बार ऐसा करने से झुर्रियां कम हो सकती हैं।

एलर्जी या संक्रमण से होते हैं त्वचा संबंधी रोगa

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सोरायसिस की समस्या त्वचा की सबसे ऊपरी परत एपिडर्मिस पर होती है। सामान्य रूप से यह तकलीफ हमारी त्वचा पर लाल रंग की सतह के रूप में उभरती है जिसमें स्कैल्प (सिर की सतह), हथेलियां, तलवे, कोहनी, घुटने और पीठ आदि अंग ज्यादा प्रभावित होते हैं। इस रोग के कारणों का फिलहाल कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है लेकिन कई शोधों में यह माना गया है कि आनुवांशिकता, एलर्जी या किसी प्रकार के संक्रमण से यह परेशानी हो सकती है। इसके अलावा मौसम में होने वाले बदलाव भी इसका कारण बनते हैं। लक्षण : इस रोग से प्रभावित हिस्से की चमक कम होने से त्वचा रूखी, फटी और मोटी दिखाई देती है व उसमें खुजली भी होती है। सोरायसिस के क्रॉनिक व गंभीर होने पर करीब 40 प्रतिशत रोगियों में जोड़ों में दर्द व सूजन जैसे लक्षण भी पाए जाते हैं। इस अवस्था को सोराइटिस आर्थराइटिस कहते हैं। यह बीमारी सर्दियों में ज्यादा परेशान करती है। होम्योपैथिक उपचार- सोरायसिस के उपचार में बाह्य प्रयोग के लिए एंटिसोरियेटिक क्रीम/ लोशन/ ऑइंटमेंट की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन जब बाह्योपचार से लाभ न हो तो एंटीसोरिक और सिमटोमेटिक होम्योपैथिक औषधियों का प्रयोग...

त्वचा की चमक निखारेगा एलोवेरा, पानी पीकर वजन घटाएं

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अक्सर विशेषज्ञ त्वचा पर एलोवेरा युक्त उत्पाद या सीधे एलोवेरा जैल लगाने की सलाह देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार एलोवेरा पाचन दुरुस्त रखने के साथ-साथ त्वचा की चमक को भी बनाए रखता है। इसमें त्वचा की नमी और लचीलेपन को बरकरार रखने की अद्भुत क्षमता होती है। रोजाना एलोवेरा जैल से चेहरे पर मसाज करने से झुर्रियों की समस्या नहीं होती। यह कुदरती एंटीबैक्टीरियल और एंटीबायोटिक है। कील-मुंहासों पर एलोवेरा लगाने से वे जल्द ठीक होते हैं। साथ ही यह इंफेक्शन रोकने में भी मददगार है। पानी पीकर वजन घटाएं - जर्मन शोधकर्ताओं के अनुसार पानी पीने के 10मिनट बाद शरीर की मेटाबॉलिज्म प्रक्रिया तेज होकर 40 मिनट बाद कैलोरी बर्न होने लगती है। शोधकर्ताओं के अनुसार रोजाना 8 गिलास पानी पीने से दिनभर में 100 कैलोरी बर्न होती है। वैसे वजन घटाने के लिए ठंडा पानी अच्छा है क्योंकि पानी के तापमान को शरीर के तापमान तक लाने के लिए बॉडी को कैलोरी बर्न करनी पड़ती है जिससे मोटापा घटता है।

स्किन पर लाल चकत्ते, खुजली और जलन महसूस होती है तो जानें एक्जिमा के बारे में

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एक्जिमा त्वचा संबंधी रोग है जिसमें स्किन पर लाल चकत्ते बन जाते हैं। बार-बार खुजली और जलन महसूस होती है। ऐसे में कई बार बैक्टीरियल इंफेक्शन से ये चकत्ते पक जाते हैं जिनमें से पानी आने लगता है। यह एलर्जी के अलावा मौसम में बदलाव होने पर भी प्रभावित करती है। जानते हैं इसके बारे में - एक्जिमा के चार प्रकार हैं- कॉन्टेक्ट, एटोपिक, डिस्कॉयड और सेबोरहोइक। यह समस्या बच्चों से लेकर बुजुर्गों को किसी भी मौसम में हो सकती है। 1. कॉन्टेक्ट एक्जिमा - संक्रमण फैलाने व बढ़ाने वाले कारक त्वचा के संपर्क में आकर इसका कारण बनते हैं। इसमें किसी प्रकार की धातु, ज्वैलरी, डिटर्जेंट पाउडर, साबुन, सौंदर्य प्रसाधनों, परफ्यूम, क्रीम व लोशन, शैंपू आदि में पाए जाने वाले रसायन एलर्जी की समस्या उत्पन्न कर एक्जिमा को बढ़ाते हैं। परेशानी : हाथ-पैर, गले या ऐसी जगह जो संक्रमित वस्तु के संपर्क में आए। 2. एटोपिक एक्जिमा - यह ज्यादातर होने वाले एक्जिमा का प्रकार है। फैमिली हिस्ट्री होने पर यह समस्या होती है। परेशानी : कोहनी, गाल, गर्दन, पैर का टखना, घुटने के पीछे का हिस्सा या चेहरे पर यह तकलीफ ज्यादा होती है। 3. डिस...