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Showing posts from April, 2019

नाक पर पड़ने वाले चश्मे के निशानों से एेसे पाएं छुटकारा

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आंखों की दृ ष्टिदोष के कारण या सूर्य की तेज रोशनी से बचाव के लिए हम चश्मा पहनते हैं। चश्मे के फ्रेम का वजन हमारी नाक पर आंखों के नीचे निशान बना देता है। इन निशानों को दूर करने के लिए कुछ प्राकृतिक चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइये जानते हैं चश्में के कारण नाक पर पड़ने वाले निशानों को हटाने के तरीकों के बारे में... एलोवेरा : त्वचा का कूलिंग एजेंट है एलोवेरा। चश्मे से नाक पर बने माक्र्स को मिटाने के लिए एलोवेरा के गूदे को इस निशान पर लगाएं। इसे सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। आलू : उबले आलू का पेस्ट बनाएं और मार्क्स पर लगाकर 15 मिनट तक सूखने दें। इस पेस्ट को प्रतिदिन लगाएं। मार्क्स मिट जाएंगे। ककड़ी: ककड़ी की स्लाइस मार्क्स पर रखें और आंखों के आसपास स्लाइस हल्के से रगड़ें। नीबू : पानी के साथ नींबू का घोल बनाएं। इसे रुई के फाहे से डार्क स्पॉट्स पर लगाएं। 15 मिनट बाद मुंह धो लें।

अच्छी डाइट से पाएं से खूबसूरत त्वचा

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जीभ से लेकर गले तक महज क्षणिक स्वाद के लिए हम जंकफूड, तले-भुने या मिर्च-मसाले वाले फूड आइटम खाने से परहेज नहीं करते। लेकिन जैसे ही यह चीजें पाचनतंत्र में जाती हैं पेट को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती हैं। यही हाल बना रहे तो ब्लड प्रेशर, मोटापा, डायबिटीज और त्वचा संबंधी अनेक दिक्कतें सामने आने लगती हैं। ब्यूटी एक्सपर्ट ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि आपकी खुराक यानी डाइट में ही खूबसूरती व सेहत का राज छिपा है। इसे सही तरीके से फॉलो किया जाए तो कोई भी जवां बना रह सकता है। जानते हैं किस तरह से डाइट, सही मेकअप और व्यायाम से हैल्दी स्किन पाई जा सकती है। डाइट की डोज - रोजाना कम से कम दो फल जरूर खाएं और 7-8 गिलास पानी पिएं। कम चीनी, कम नमक, कम तेल व अधिक फाइबर वाली चीजें जैसे मशरूम, मटर, पालक आदि को डाइट में शामिल करें। फलों का जूस पीने की बजाय उन्हें छिल्कों के साथ खाएं ताकि उनमें फाइबर बना रहे। यही फाइबर पाचनतंत्र को दुरुस्त रखेगा व त्वचा सेहतमंद रहेगी। रोजाना चार किशमश, पांच बादाम, एक अखरोट और एक चम्मच अलसी के बीज खाएं। मेकअप का मंत्र - सर्दी हो या गर्मी हमेशा सनस्क्रीन जरूर लगाएं।...

सौंदर्य प्रसाधनों का ज्यादा प्रयोग बढ़ा सकता है परेशानी

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बेन्जोल पैरॉक्साइड : मुंहासों के उपचार के लिए बनने वाले उत्पादों में इस रसायन का उपयोग किया जाता है। हालांकि यह बहुत कम मात्रा में प्रयोग किया जाता है। इससे त्वचा में रूखापन होने के साथ खुजली भी हो जाती है। जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है, उन्हें इससे जलन, खुजली व सूजन आदि की परेशानी हो सकती है। इसे कैंसर कारक भी माना जाता है। ट्राइक्लोसन : बाजार में मौजूद कई एंटीबैक्टीरियल साबुन व सौंदर्य प्रसाधनों में इसका प्रयोग किया जाता है। इसके फायदे के कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। हालांकि यह माना गया है कि यह रसायन त्वचा में खुजली पैदा करने के साथ थायरॉइड हार्मोन की सामान्य क्रिया प्रभावित करता है। फॉर्मलडीहाइड : इसका प्रयोग सामान्यत: बॉडी वॉश, शैम्पू और कंडीशनर्स आदि में किया जाता है। माना जाता है कि यह एंटीबैक्टीरियल ग्रोथ रोकता है। कैंसर के कारणों की खोज करने वाली कई एजेंसीज के मुताबिक यह रसायन कैंसर का खतरा बढ़ाता है। पीईजी-6 : साबुन में प्रयोग किए जाने वाला यह पदार्थ कैंसर का खतरा बढ़ाता है। पैराबेन : सौंदर्य प्रसाधनों में इसका प्रयोगे प्रिजरवेटिव के रूप में किया जाता है। अधिकतर...

घरेलू नुस्खे: घी लगाने से त्वचा को ये मिलता फायदा

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ड्राई स्किन: इस समस्या से राहत पाने के लिए घी की कुछ बूंदों से स्किन पर कुछ मिनटों तक मालिश करें। इससे स्किन सॉफ्ट और कोमल बनेगी। झुर्रियां: घी में विटामिन ई पाया जाता है, जो स्किन की झुर्रियों को दूर करता है। डार्क सर्कल्स: आखों के नीचे घी की 1-2 बूंदें लेकर मसाज करें। इससे डार्क सर्कल कम होंगे होंठ: घी लिप बाम की तरह काम करता है। इससे होंठ सॉफ्ट रहते हैं। मॉइश्चराइजर की जगह घी: नहाने के बाद मॉइश्चराइजर की जगह घी से मालिश कर सकते हैं। इससे स्किन मुलायम होगी। रूसी में लाभ : यदि बालों में रूसी हो गई है तो बालों की जड़ों में घी और बादाम के तेल की मसाज करने से जल्द ही रूसी से छुटकारा मिल जाएगा। इससे सिर की त्वचा में रूखापन भी नहीं आता है। यदि बाल पोषण की कमी से ये दोमुंहे हो रहे हैं तो घी की मसाज फायदेमंद हो सकती है। ये बालों को मुलायम बनाकर उनके उलझने की समस्या से भी मुक्त कर देगी।

एड़ियां फट गई है तो घबराएं नहीं, करें ये उपाए

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गुनगुने पानी में पैर रखने से त्वचा नरम होती है हम अक्सर चेहरे, हाथों की देखभाल करते हैं, लेकिन एडिय़ों का ध्यान नहीं रखते हैं। एड़ी पर ध्यान न देने से रूखेपन के कारण ये फटने लगती हैं। इन्हें नरम और रूखेपन, फटने से बचाने के लिए पैरों पर तेल की मालिश और ग्लिसरीन लगाते हैं। एडिय़ों से मृत त्वचा हटाने के लिए गुनगुने पानी में पैर रखने से त्वचा नरम होती है। यह करने से मिलेगा लाभ चावल के आटे में नींबू का रस मिलाकर स्क्रब करें। नहाने के बाद, रात को सोने से पहले मॉइस्चराइजर, तेल व ग्लीसरीन लगाएं। नंगे पैर फर्श पर न घूमें, सर्दी में सूती जुराब और जूते पहनकर रहेंं। कम पानी पीने से भी एडिय़ां फटती हैं। इसलिए दिनभर में 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं। रात में सोने से पहले एडिय़ों में नारियल और सरसों का तेल लगाकर सोएं। इससे एडिय़ां मुलायम हो जाती हैं। फटती नहीं हैं।

प्लेटलेट रिच प्लाज्मा से कम होंगी झुर्रियां, जानें इसके बारे में

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दमकती त्वचा और लंबे घने बाल महिलाओं की पहली चाहत होती है। आजकल तो पुरुष भी अपने लिए ऐसी इच्छा रखते हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली की वजह से शरीर में विटामिन-डी, सी और ए की कमी हो रही है। साथ ही पूरी नींद न लेने व बढ़ते प्रदूषण आदि के कारण भी बाल झड़ने व कम उम्र में ही उम्रदराज दिखने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इनसे राहत पाने के लिए लोग खानेपीने की आदतों में बदलाव करते व दवाइयां (खाने और लगाने की) आदि लेते हैं। लेकिन कई बार ये उपाय भी काम नहीं आते। ऐसी स्थिति में प्लेटलेट रिच प्लाज्मा (पीआरपी) तकनीक फायदेमंद हो सकती है। पीआरपी की प्रक्रिया : इसमें मरीज के शरीर से 20 से 30 मिलिलीटर खून निकाला जाता है। फिर इस खून को प्लाज्मा में बदलकर इंजेक्शन की सहायता से त्वचा में जरूरत की जगह इंजेक्ट किया जाता है। प्लाज्मा में वृद्धिकारक तत्त्व अत्यधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। इसे बालों की जड़ों में इंजेक्ट करने से जड़ों को जरूरी पोषक तत्त्व मिल जाते हैं और उनको ताकत मिलने से बाल बढ़ने लगते हैं। त्वचा में कसाव : यही वृद्धिकारक तत्त्व चेहरे की त्वचा में मौजूद कोलेजन नामक प्रोटीन को भी बढ़ाने में सहायक ...

वात-पित्त के असंतुलन से होती है सोरायसिस की समस्या

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सोरायसिस त्वचा संबंधी एेसी बीमारी है जिसमें त्वचा की कोशिकाओं में तेजी से वृद्धि होने लगती है। आयुर्वेद के मुताबिक यह समस्या वात-पित्त के असंतुलन से होती है। इसकी वजह से शरीर में विषैले तत्त्व इकट्ठे हो जाते हैं जो रक्त व मांसपेशियों के अलावा इनके अंदर के ऊत्तकों को संक्रमित करने लगते हैं। जिससे व्यक्ति इस बीमारी से ग्रसित हो जाता है। यह समस्या ज्यादातर कोहनी, घुटने व सिर की त्वचा को प्रभावित करती है। ये भी हैं कारण : आनुवांशिकता को भी इसका मुख्य कारण माना जाता है। यदि माता-पिता में से किसी एक को यह समस्या है तो बच्चे में इसका खतरा 15 प्रतिशत बढ़ जाता है। माता-पिता दोनों को एेसी परेशानी है तो बच्चे में इसकी आशंका 60 प्रतिशत तक होती है। इसके अलावा दो अलग किस्म का भोजन जैसे दूध के साथ खट्टी व नमकीन चीजें खाने, त्वचा कटने, चोट लगकर घाव होने या जलने, एलर्जी वाली दवाओं के नियमित इस्तेमाल, धूम्रपान व शराब की लत और अधिक तनाव से भी यह समस्या हो सकती है। लक्षण : त्वचा पर सफेद परत, खुजली, जलन, फोड़े-फुंसी, फफोले, त्वचा में दर्द और सूजन, रूखे धब्बे व धब्बों से खून आना आदि। आयुर्वेदिक उपचार...

ऐसे करें बालों की केयर

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बढ़ती उम्र के साथ बालों का सफेद होना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन यदि छोटी उम्र में बाल सफेद हो रहे हैं तो आयुर्वेद के अनुसार नुस्खे आजमाकर इन्हें असमय सफेद होने से बचाया जा सकता है। डैंड्रफ भी बालों की झड़ने की मुख्य वजह है। बालों से जुड़ी समस्याओं का सबसे बड़ा कारण संयमित आहार नहीं खाना और अनियमित जीवनशैली है। यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए तो परिणाम गंभीर हो सकते हैं। करें ये उपाय: बालों के झडऩे और सफेद होने का मुख्य कारण डैंड्रफ (रूसी) है। यदि नहाने के तुरंत बाद गीले बालों पर तेल लगा लिया जाएं तो डैंड्रफ हो सकता है। आयुर्वेद के अनुसार भृंगराज चूर्ण, आंवला चूर्ण, काले तिल और मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर इसका पाउडर बना लें। प्रतिदिन सुबह और शाम एक चम्मच पाउडर लिया जाए तो बालों का सफेद होना रुक जाएगा। इसके साथ ही बाल घने होंगे और उनका झडऩे में भी कमी आएगी।

टाइट जींस व हाई हील्स के कारण होती है वैरीकोज अल्सर की समस्या

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वैरीकोज अल्सर क्या है ? पैरों की नसें मोटी होना वैरीकोज वेंस कहलाता है। यदि इसका समय रहते इलाज न किया जाए तो यह वैरीकोज अल्सर में बदल सकता है। एक अनुमान के मुताबिक भारत की लगभग 7 से 9 प्रतिशत आबादी वैरीकोज वेंस से पीड़ित है। इससे पीड़ित महिलाओं की तादाद पुरुषों के मुकाबले चार गुना ज्यादा है। तंग जींस व हाई हील पहनने से यह समस्या कम उम्र की युवतियों को भी होने लगी है। वैरीकोज अल्सर के क्या कारण हैं ? पैरों की नसों में कई वॉल्व होते हैं जिनसे हृदय तक रक्तप्रवाह में मदद मिलती है। मोटापा, व्यायाम का अभाव, गर्भधारण के दौरान नसों पर असामान्य दबाव, लंबे समय तक खड़े रहना व अधिक देर तक टांग लटकाकर बैठने से कई बार ये वॉल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इससे उस स्थान पर रक्त जमा होने लगता है जिसे वैरीकोज वेंस की समस्या कहते हैं। गंभीर होकर यही अल्सर का रूप ले लेती है। रोग के लक्षण क्या हैं ? ग्रसित स्थान पर सूजन व दर्द, थकान, बदरंग त्वचा, खुजली व नसों में सूजन जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस बीमारी का इलाज क्या है ? इस रोग के इलाज में रेडियो फ्रिक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) प्रभावी पद्धति है। कलर-ड...