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Showing posts from August, 2019

जानिए त्वचा और बालों को विटामिन- ई से होने वाले फायदों के बारे में

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त्वचा की रौनक बढ़ानी हो या बालों को घना-चमकदार करना हो तो विटामिन-ई उपयोगी है। मार्केट में विटामिन-ई से युक्त कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स के अलावा इसके कैप्सूल भी मौजूद हैं। जानें इसके फायदों के बारे में.. स्ट्रेच माक्र्स हटाए - गर्भावस्था के दौरान महिला को त्वचा पर निशान (स्ट्रेच माक्र्स) की समस्या रहती है। बचाव के लिए दो विटामिन-ई के कैप्सूल को निचोड़कर इसका तेल निकालें व एक बड़ा चम्मच नारियल तेल व ऑलिव ऑयल में मिलाएं। इस मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा एक सप्ताह तक रोजाना प्रभावित हिस्से पर लगाएं। त्वचा को दे नमी - एक चम्मच मलाई लेकर उसमें एक विटामिन-ई का कैप्सूल निचोड़ें और अच्छे से मिक्स कर लें। सोने से २० मिनट पहले इस मिश्रण को चेहरे के अलावा हाथ-पैरों और शरीर के किसी भी रूखे हिस्से पर लगा सकते हैं। इसके बाद गुनगुने पानी से इसे धो लें। यह एक तरह से बॉडी लोशन का काम करेगा। बालों को करे घना - विटामिन-ई बालों की अच्छी ग्रोथ के लिए बेहद जरूरी है। इसके लिए जब भी बालों को धोना हो उससे दो घंटे पहले एक कैप्सूल को निचोड़ लें। इसमें जो तेल आप नियमित इस्तेमाल में लेते हैं जैसे नारियल, सरसों, आंवला, भ...

ब्लैकहेड्स व मुहांसों से राहत दिलाएगा नीम के पत्तों का पानी, ऐसे करें इस्तेमाल

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किसी भी तरह के संक्रमण या त्वचा संबंधी रोग, जानवर के काटने या बाहरी रूप से कोई चोट लगने पर विशेषज्ञ नीम का प्रयोग करने की सलाह देते हैं। यह बाहरी रूप से संक्रमण को खत्म कर तुरंत राहत देता है। जानते हैं इसके फायदे और प्रयोग के बारे में- संक्रमण से बचाव : नीम की पत्तियों में खासकर यदि पत्तियां ताजा हों तो इनमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीवायरल गुण काफी मात्रा में पाए जाते हैं। ये किसी भी तरह के संक्रमण व मौसमी रोगों से बचाती हैं। संक्रमण और प्रभावित भाग पर सूजन हो तो उसमें भी आराम मिलता है। गैस पर धीमी आंच पर एक भगोने पानी में नीम की 20-25 पत्तियों को उबालें, ठंडा होने पर छानें और इससे नहाएं। इससे शरीर पर होन वाली खुजली व दानें आदि की समस्या खत्म होगी। ब्लैकहेड्स : ब्लैकहेड्स, वाइटहेड्स जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं में भी नीम उपयोगी है। इसके लिए कुछ पत्तियों को चटनी की तरह पीसकर दही, शहद या दूध में मिलाकर पेस्ट की तरह चेहरे पर लगाएं। मुहांसों से राहत : त्वचा पर उभरने वाले मुहांसों को दूर करने में भी इन पत्तियों को प्रयोग में ले सकते हैं। इसके लिए नीम की पत्तियों वाला गुनगुना पा...

लम्बे, काले, घने, मजबूत बालों के लिए एेसे करें देखभाल

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लम्बे, काले घने बाल किसी की भी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं। लेकिन आजकल की व्यस्त दिनचर्या के कारण बालाें की सही देखभाल नहीं हाे पाती है। जिससे बाल टूटने व झड़ने लगते हैं। अाइए जानते हैं किस तरह से बालाें की देखभाल कर इन्हें स्वस्थ बनाया जा सकता है:- - हर व्यक्ति की शारीरिक संरचना के अनुसार बालों का प्रकार और जरूरत अलग होती है। इसलिए जो शैम्पू या तेल आपको सूट करे वही प्रयोग में लेना चाहिए। बार-बार शैम्पू या तेल बदलने से बाल टूटते व झड़ते हैं। इसके अलावा मौसम और पानी के बदलाव से भी बाल झड़ने लगते हैं। - शरीर में पोषक तत्त्वों की पूर्ति के लिए आयरन, कैल्शियम और हाई प्रोटीन से युक्त खाद्य सामग्री के अलावा बायोटीन विशेष रूप से बालों की ग्रोथ के लिए चिकित्सक की सलाह से ले सकते हैं। - हरी पत्तेदार सब्जियां, चुकंदर, मौसमी व रसीले फल और सूखे मेवे खाने चाहिए हैं। - ऑलिव ऑयल, बादाम व नारियल तेल से सिर की त्वचा (स्कैल्प) की मालिश हफ्ते में 3-4 बार करनी चाहिए। इससे बालों की जड़ों में रक्तसंचार बेहतर होने के साथ बाल मजबूत होते हैं। ध्यान रखें कि बालों को कसकर न बांधें। - केमिकल युक्त हे...

Eye Care in Monsoon - आंखों पर न लगाएं गंदे हाथ

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बरसात का माैसम जहां गर्मी से राहत पहुंचाता है वहीं कर्इ संक्रामक राेग भी साथ लाता है।इस माैसम में हमें अपनी सेहत का का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकार आंखाें की देखभाल इस मौसम में बेहद जरूरी है। बरसात में बिना डॉक्टरी राय के कोई दवा या आईड्रॉप प्रयोग में न लें। इससे मोतियाबिंद, ग्लूकोमा की आशंका बढ़ सकती है।आइए जानते मानसून में आंखाें में हाेने वाले राेग आैर सावधानी ( Eye Care in Monsoo n ) के बारे में :- मानसून में आंख संबंधी रोग कौनसे होते हैं? आंखों के संक्रमण जैसे- कंजक्टिवाइटिस ( Conjunctivitis ) , आई फ्लू ( Eye Flu ), कॉर्नियल अल्सर ( Corneal ulcer ) व ड्राई आई ( Dry Eye ) जैसे रोग ज्यादा होते हैं। इस मौसम की शुरुआत में वातावरण में फैली हुई सल्फर डाईऑक्साइड जैसी गैस पानी में मिलकर एसिड रेन बनाती है। इसलिए शुरुआती बारिश में भीगने से बचें। कंजक्टिवाइटिस कैसे फैलता है? कंजक्टिवाइटिस ( Conjunctivitis ) आंखों में गंदे हाथ लगाने, संक्रमित रुमाल, तौलिया या दवा के प्रयोग से फैलता है। बिना नेत्र रोग विशेषज्ञ की राय के स्टेरॉयड ड्रॉप लेने पर ग्लूकोमा, मोतियाबिंद या कॉर्नियल अल्सर ह...

women's health - ट्यूबलाइट से भी महिलाओं के चेहरे पर पड़ सकती हैं झुरियां

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गैस की आंच, सूरज की रोशनी, कंप्यूटर स्क्रीन, ट्यूबलाइट व सीएफएल आदि से निकलने वाली पराबैंगनी किरणें चेहरे के रोग 'मेलास्मा' यानी झाइयों का कारण बनती हैं। कोमल त्वचा जब इन किरणों के संपर्क में बार-बार आती है तो रंग बनाने वाले मेलोनोसाइट्स रिसेप्टर्स के प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन असंतुलित होकर झाइयों का रूप ले लेते हैं। इससे 20-50 वर्ष तक की महिलाएं व गर्भवती महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। गर्भावस्था अवधि के बाद तकलीफ ठीक हो जाती है। तनाव व खून की कमी : गर्भावस्था के दौरान तनाव, हार्मोनल बदलाव और खून की कमी भी समस्या का कारण बनती है। इन कारणों से त्वचा को समुचित पोषण नहीं मिल पाता और झाइयां उभरने लगती हैं। गर्भनिरोधक दवाएं भी कारण : गर्भनिरोधक दवाओं का इस्तेमाल भी बीमार बनाता है। बार-बार या लगातार इन्हें लेने से त्वचा की सेहत प्रभावित होती है। ऐसे में जब भी महिला तेज धूप, गैस की आंच या किसी अन्य तरह से निकलने वाली अल्ट्रावॉयलेट किरणों के संपर्क में आती है तो त्वचा में बदलाव आने लगते हैं। गाल, नाक और माथे पर काले निशान बनने लगते हैं जो किसी में हल्के और किसी में गहरे होते हैं। ...

ये फेसपैक चेहरे को बनाएंगे खूबसूरत, जानें कैसे लगाएं

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मुंहासे चेहरे की चमक को फीका कर देते हैं। ऐेस कई आयुर्वेदिक नुस्खे हैं जो आसानी से घर में तैयार किए जा सकते हैं। ये बिना किसी दुष्प्रभाव के त्वचा को चमकदार बनाने के साथ मुंहासों की समस्या से राहत देते हैं। जानते हैं इनके बारे में- चंदन का फेसपैक : चंदन पाउडर में गुलाब जल मिलाकर चेहरे पर लगाएं। सूख जाने के बाद इसे धो लें। अगर चेहरे पर मुहांसे हों तो दूध में 1 चम्मच चंदन पाउडर और एक चम्मच चावल का आटे मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे चेहरे के लगाएं। चंदन की तासीर ठंडी होने के कारण यह त्वचा को राहत पहुंचाता है। साथ ही ये पेस्ट मृत कोशिकाओं को हटाता है। एलोवेरा-नींबू - दो चम्मच एलोवेरा के गूदे में एक चम्मच गुलाब जल और एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे 15 मिनट के लिए चेहरे पर लगाएं और धो लें। त्वचा की चमक बढ़ेगी। बेसन व हल्दी का फेस पैक : थोड़ा सा लैवेंडर ऑयल लें इसमें दो चम्मच बेसन, एक चुटकी हल्दी, एक चम्मच मक्खन या ताजी क्रीम को अच्छे से मिला लें। अब इस पेस्ट को चेहरे पर लगाएं। यह पैक त्वचा की डेड स्किन को निकालकर निखार लाता है। मुल्तानी मिट्टी : अगर आपकी त्वचा ऑयली है तो...

मुंहासों की समस्या पैदा कर सकते हैं फूड सप्लीमेंट्स

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अक्सर बॉडी बिल्डिंग के दौरान फूड सप्लीमेंट्स लेने वाले पुरुषों में खासकर पीठ व सीने पर मुंहासों की समस्या देखी जाती है। आइए जानें इसका कारण व इलाज :- ऐसे होता असर : हमारे शरीर के बाल, नाखून व त्वचा पर प्रोटीन व बायोटीन नामक विटामिन होता है। बॉडी बिल्डिंग सप्लीमेंट्स में मौजूद एक्स्ट्रा प्रोटीन त्वचा के नेचुरल ऑयल को बढ़ाकर रोमछिद्र को बंद कर देता है। इसी कारण मुंहासे उभरने लगते हैं। - इन सप्लीमेंट्स में यदि प्रोटीन के साथ स्टेरॉएड्स भी मिला होता है तो मुंहासों की आशंका बढ़ जाती है। - स्टेरॉएड से होने वाले मुंहासे का एक अलग प्रकार होता है जो कई मामलों में गंभीर रूप ले लेता है। डाइटीशियन की सलाह जरूरी: बॉडी बिल्डिंग के दौरान या किसी भी कारण से कोई भी फूड सप्लीमेंट ले रहे हैं तो उससे पहले डाइटीशियन की सलाह जरूर लें। कारण हर व्यक्ति के शरीर में प्रोटीन की मात्रा की जरूरत अलग होना और जितना प्रोटीन ले रहे हैं उसका उसी तरह इस्तेमाल होना अहम है।

हाॅॅॅमाेनल बदलाव के कारण होते हैं मुहांसे, एेसे करें बचाव

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मुंहासों की समस्या सिर्फ लड़के- लड़कियों की नहीं बल्कि बच्चों व बड़ों में भी आम होती जा रही है। सामान्यतः त्वचा पर मौजूद ऑयल ग्रंथियां त्वचा को तैलीय बनाने में मददगार होती हैं जो त्वचा को सुरक्षित रखती हैं। लेकिन इन ग्रंथियाें में जब तेल सामान्य से ज्यादा बनने लगता है तो त्वचा की बाहरी सतह ब्लॉक होने लगती है जिससे तेल अंदर ही रहता है और इसे बाहर निकलने में दिक्कत होती है। ऐसे में ग्रंथियाें में कीटाणु पनपकर इंफेक्शन पैदा करते हैं जो मुंहासों के रूप में चेहरे, छाती, पीठ, हाथ, स्कैल्प आदि की त्वचा पर उभरते हैं। हर व्यक्ति में इसका कारण अलग हो सकता है। मुंहासों की समस्या के कई कारण प्रमुख कारण हार्मोन्स में बदलाव है जो खासतौर पर युवावस्था में देखा जाता है। मुंहासों की समस्या मूलत: आनुवांशिक है जिसमें त्वचा की ऑयल ग्रंथियां ब्लॉक होने लगती हैं। लेकिन कई बार आनुवांशिकता मूल वजह न होकर खराब दिनचर्या, भोजन और तनाव भी परेशानी की वजह बनते हैं। तेज धूप में लंबे समय तक रहना या सही तरीके से चेहरे की सफाई न होने से भी दिक्कत होती है। मुंहासों की गंभीरता के अनुसार अवस्थाएं हल्की - ऑयल अंदर पड़...

SUNSCREEN : इस सुहावने मौसम में निकलेंगे तो झुलस जाएगी त्वचा

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बारिश के सुहावने मौसम में अक्सर बादल छाये रहते हैं। ठंडी हवाएं भी चलती हैं और अक्सर युवा मस्ती के लिए यूं ही बाहर निकल पडते हैं। ऐसा मानते हैं कि अल्ट्रावायलेट किरणें नुकसान नहीं पहुंचाएंगी। लेकिन सच यह नहीं है। इस दौरान भी 80 प्रतिशत तक अल्ट्रावायलेट किरणें धरती तक पहुंच जाती हैं। यह त्वचा को धूप के जैसा ही नुकसान पहुंचाती हैं। इससे बचने के लिए सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। यदि ऐसा नहीं करते हैं तो स्किन को नुकसान होता है। चार घंटे ही रहती है प्रभावी सनस्क्रीन त्वचा को अल्ट्रावायलेट दुष्प्रभाव से बचाती है। यह दो प्रकार की - केमिकल व फिजिकल होती है। केमिकल सनस्क्रीन से कई बार दिक्कत भी हो सकती है। फिजिकल सनस्क्रीन नॉन रिएक्टिव होती है। एक सनस्क्रीन चार घंटे तक त्वचा पर प्रभावी होती है। इसे दिन में तीन-चार बार लगाना चाहिए। कितना एसपीएफ जरूरी है सामान्यत: 2.5 मि.ली. सनस्क्रीन की जरूरत होती है। सामान्यत: 26, 30 एसपीएफ की जरूरत होती है। सन एलर्जी होने पर ही 50 एसपीएफ की क्रीम लगानी चाहिए। एक्सपर्ट : डॉ. अमित तिवारी, डर्मेटोलॉजिस्ट, एसएमएस मेडिकल कॉलेज, जयपुर

सनग्लास खरीदते समय यूवी प्रोटेक्शन क्वालिटी का रखें ध्यान, जानें ये खास बातें

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किसी भी मौसम में सनग्लास का इस्तेमाल किया जा सकता है। यह आंखों को धूल से बचाने के साथ रोगों से भी दूर रखते हैं। अक्सर देखा जाता है कि लोग इसे खरीदते समय यूवी प्रोटेक्शन क्वालिटी देखने की बजाय लुक पर अधिक फोकस करते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। स्किन कैंसर : दस प्रतिशत स्किन कैंसर आईलिड पर पनपते हैं। कई शोध में भी सामने आया है कि सनग्लासेज पहनने से ऐसा होने की आशंका काफी कम हो जाती है। टेरिजियम : इसमें आंखों के एक किनारे से एब्नार्मल टिश्यू की ग्रोथ शुरू हो जाती है व दृष्टिबाधित होने लगती है। मोतियाबिंद : डब्लूएचओ के मुताबिक दुनिया में करीब 9 लाख लोग मोतियाबिंद के कारण आंखों की रोशनी खो देते हैं। ऐसा अल्ट्रावॉयलेट किरणों के सीधे संपर्क में आने से होता है। अच्छी क्वालिटी के सनग्लासेज अल्ट्रावॉयलेट किरणों का एक्सपोजर 100 प्रतिशत तक कम कर देते हैं। मैक्यूलर डीजेनरेशन: आंखें अल्ट्रावॉयलेट किरणों के अधिक संपर्क में रहने पर मैक्यूला (आंखों का हिस्सा जहां लाइट सेंसिंग सेल्स होते हैं व जिसकी वजह से हम स्पष्ट देख पाते हैं) को नुकसान पहुंचता है।

कॉन्टैक्ट लेंस का करते हैं इस्तेमाल ताे इन बाताें का रखें ध्यान

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कॉन्टैक्ट लेंस ( contact lens ) की सफाई पर अगर ध्यान न दिया जाए तो कंजक्टिवाइटिस ( Conjunctivitis ) , कॉर्नियल एब्रेशन ( corneal abrasion ) या कॉर्निया पर सफेद दाग हो सकते हैं। समय रहते इन समस्याओं पर ध्यान न दिया जाए तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। अगर लैंस को सही तरीके से नहीं लगाया जाता है तो ये कॉर्निया की फिजियोलॉजी को बदल सकते हैं। इसलिए लैंस का इस्तेमाल नेत्र रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें। कितनी देर तक लगाएं कॉन्टेक्ट लेंस ( how long can you wear contact lenses ) इसका उपयोग अपनी जरूरत के आधार पर किया जा सकता है। दिन में सुरक्षित तरीके से 10 घंटे तक लगा सकते हैं। अगर आप सफाई पर ध्यान नहीं देंगे तो इससे आंखों में संक्रमण का खतरा रहता है। कॉन्टेक्ट लेंस के दुष्प्रभाव ( Side effects of contact lenses ) कांटेक्‍ट लेंस आँखों के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं, क्‍योंकि लगातार इस्तेमाल से इनकी आगे व पीछे की सतह पर बैक्‍टीरिया व अन्‍य संक्रमण जनक घटक इकट्ठे होते जाते हैं।अगर साफ सफार्इ का ध्यान रखा जाए ताे संक्रमण हाेने का खतरा बढ़ जाता है। सावधानी ( Contact Lens Precautio...

50 की उम्र में भी सफेद बालों को जड़ से काला कर देंगे ये देसी नुस्खे

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छाेटी उम्र में बाल सफेद हाेना इन दिनाें के आम समस्या बन गर्इ है।जिसका कारण अनियमित दिनचर्या, पौष्टिक भोजन की कमी, आनुवांशिकता, तनाव, प्रदूषण, रोग, बहुत ज्यादा शैंपू और तेल का उपयोग करना है।वैज्ञानिक रूप से जब बालों में मेलानिन पिग्मेंटेशन की कमी होने लगती है तो बाल अपना काला रंग खोकर सफेद हो जाते हैं। घर पर मिलने वाली चीजों का उपयोग कर और प्राकृतिक तरीके अपनाकर बालों का रंग दुबारा काला ( home remedies for grey hair turns into black ) किया जा सकता है।भारत की पुरातन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार एेसे कर्इ नुस्खे हैं जिनकी सहायता से असमय सफेद हुए बालाें काे लम्बे समय तक के लिए जड़ से काला किया जा सकता। आइए जानते हैं इन देसी नुस्खाें ( Desi nuskhe ) के बारे में :- सफेद बालों को काला करने के देसी नुस्खे ( Desi nuskhe for premature grey hair ) - भृंगराज और अश्वगंधा ( Bhringraj Ashwagandha ) की जड़ों का पेस्ट नारियल के तेल में मिलाकर बालों की जड़ों में लगाएं। एक घंटे बाद गुनगुने पानी से बालों को धो लें। - ब्राह्मी ( Brahmi ) की पत्तियों को पीसकर नारियल या ऑलिव ऑयल में उबालें। इसे छ...

सनस्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल सेहत के लिए है नुकसानदायक

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एक रिसर्च के आधार पर कहा गया है कि नियमित और अधिक मात्रा में सनस्क्रीन लगाने से हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। सनस्क्रीन त्वचा की सूर्य की किरणें अवशोषित करने की क्षमता कम कर देती है जिससे हमारे शरीर की जरूरत के मुताबिक विटामिन डी नहीं बन पाता है। अमरीकन ऑस्टियोपैथिक एसोसिएशन के जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है। हमारी हड्डियां हो रही हैं कमजोर - सूरज की तेज रोशनी और पराबैंगनी किरणों के बुरे प्रभाव से बचने के लिए हम सनस्क्रीन लोशन तो लगाते हैं। लेकिन इसका नियमित और अधिक इस्तेमाल से हमारी हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। इसके साथ ही कई अन्य बीमारियों की आशंका बढ़ रही है। जरूरी है सूरज की किरणों का संपर्क : रिसर्च से जुड़े विशेषज्ञ किम फोटेंहॉर बताते हैं कि सनस्क्रीन लगाने से विटामिन डी उत्पन्न करने की हमारी त्वचा की क्षमता कम हो जाती है। हालांकि सूर्य कि किरणों के सीधा संपर्क से होने वाले नुकसान, स्किन कैंसर आदि से बचने के लिए सनस्क्रीन लगाने की सलाह दी जाती है। इसके बावजूद सूरज की किरणों के संपर्क में थोड़ी देर रहना चाहिए। इससे मसल्स और हड्डियां मजबूत होती हैं। सुस्ती, थ...

साफ, चमकती और खूबसूरत त्वचा के लिए जानिए ये खास टिप्स

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यदि आप चेहरे पर होने वाले दाग-धब्बों और बारीक लाइनों के अलावा झुर्रियों से परेशान हैं तो इसके लिए आप फेशियल योग की मदद ले सकती हैं। जानते हैं इसे कैसे करें और यह किस तरह से असर करता है- ऐसे करें फेशियल योग - हमारे चेहरे पर अलग-अलग हिस्सों को मिलाकर कुल 52 मांसपेशियां होती हैं। इन मांसपेशियों का नियमित व्यायाम चेहरे, गर्दन और आंखों का तनाव दूर करता है। इससे ढ़ीली त्वचा में खिंचाव आता है। इस योग में चेहरे के प्रमुख हिस्सों पर दबाव देने के अलावा अंगुलियों से 5-10 मिनट के लिए खिंचाव दिया जाता है। जिससे रक्तसंचार बेहतर बनने से कोलेजन का निर्माण होता है और अतिरिक्त चर्बी घटने लगती है। इस योग की खास बात यह है कि इसे किसी भी समय किया जा सकता है। इस योग को कई तरह से कर सकते हैं। जैसे - गालों को फुलाकर हवा को दाएं से बाएं और बाएं से दाएं घुमाना। जीभ को क्षमतानुसार बाहर निकालकर रखना और 10-15 सेकंड बाद वापस अंदर लेना। माथे और भौंहों के बीच की त्वचा को अंगूठे और अंगुलियों से कसकर पकडऩा। होठों को बंद रखते हुए मुस्कुराना। कई हैं फायदे - मुंह में हवा भरने से चेहरे की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता...