इन प्राकृतिक चीजों से एेसे तैयार करें 'हर्बल रंग'

होली के लिए आप प्राकृतिक चीजों से हर्बल रंग तैयार कर सकते हैं ताकि कैमिकल रंग त्योहार के मजे को खराब न करें। पलाश और गुड़हल से लाल रंग, अमलतास से पीला और हरसिंगार से केसरिया रंग बनता है। इन फूलों को रातभर पानी में भिगोने के बाद पीस लें, फिर पानी में मिलाकर आवश्यकतानुसार रंग तैयार करें। रंग ज्यादा गहरा चाहिए तो इसमें फिटकरी का पाउडर मिला सकते हैं। इन पौधों की पत्तियों को पीसकर हरा रंग भी बना सकते हैं। चुकंदर को कद्दूकस कर एक बाल्टी पानी में डाल दें, आपको गुलाबी रंग वाला पानी तैयार मिलेगा।

गीले रंग बनाएं ऐसे -
गेंदे के फूलों को एक बाल्टी भर पानी में डाल दें। सुबह होने पर पीले रंग का पानी तैयार हो जाएगा। पीले रंग का पानी बनाने के लिए हल्दी का आवश्यकतानुसार प्रयोग भी किया जा सकता है। काला रंग बनाने के लिए आंवलों को लोहे की कढ़ाई में भिगो दें या इसके रस को उबाल लें।

होली खेलें लेकिन सावधानी के साथ-
होली की ऊर्जा बरकरार रहे इसके लिए जरूरी है कि आप होली खेलते समय अपनी और दूसरों की सेहत का भी ध्यान रखें। कहीं ऐसा न हो कि आपकी मस्ती-मजाक दूसरे की सेहत पर भारी पड़ जाए। जानते हैं कुछ सावधानियों के बारे में।

कान व गले की देखभाल -
ईएनटी विशेषज्ञ के अनुसार कान पर जोर से गुब्बारा लगने से कान का पर्दा फट सकता है। इससे कम सुनाई देने लगे या चक्कर आएं तो विशेषज्ञ को दिखाएं। फौरन डॉक्टर से संपर्क कर पाना संभव न हो और असहनीय दर्द हो तो ही पेन किलर लें लेकिन कान में तेल आदि न डालें। इसी तरह होली खेलते समय अगर कान में पानी चला जाए तो घबराएं नही, कई बार यह मूवमेंट होने पर अपने आप निकल जाता है। लेकिन अगर कान में भारीपन महसूस हो तो फौरन डॉक्टरी सलाह लें। जिन लोगों का कान बहता है वे होली खेलने से पहले तेल में भीगी हुई रूई को कान में लगा लें। ईयरबड या माचिस की तीली को कान में न डालें।

गले की तकलीफ : रंग चले जाने से गले में जलन महसूस हो तो गुनगुने पानी या पानी में बीटाडिन मिलाकर गरारे करें। लेकिन जलन व सूजन बढ़ती जाए तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

आंखों का खयाल रखें -
नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार आंखों में रंग चला जाए तो इन्हें मसले नहीं, इससे आंखें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। फौरन राहत के लिए आंखों को पानी से अच्छी तरह धो लें। फिर भी आंखों से पानी आता रहे या रोशनी देखते ही दर्द महसूस हो तो डॉक्टर को दिखाएं। डॉक्टर के पास जाना संभव न हो तो फोन पर ही सलाह लेकर एंटीबायोटिक ड्रॉप (मोक्सीफ्लोक्सेसिन/टोब्रामाइसिन/ ऑफ्लोक्सेसिन) आंखों में डाल सकते हैं।

त्वचा को न हो नुकसान -
त्वचा रोग विशेषज्ञ के मुताबिक कैमिकल युक्तरंगों में कांच के टुकड़े होते हैं। जब इन रंगों को रगड़ा जाता है तो त्वचा छिल जाती है जिससे काफी दर्द व जलन होने लगती है। ऐसी स्थिति होने पर त्वचा को पानी से अच्छी तरह धोएं और मॉइश्चराइजर या लोशन का प्रयोग करें। अगर त्वचा के रैशेज दो-तीन दिन बाद भी ठीक न हों और धीरे-धीरे बढ़ने लगें तो डर्मेटोलॉजिस्ट से संपर्क करें। जिन लोगों की त्वचा सेंसेटिव हो या एक्जिमा की समस्या हो उन्हें रंगों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अस्थमा के रोगियों को सूखे रंगों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। होली खेलने से पहले नारियल तेल या जैतून का तेल त्वचा व बालों पर लगाएं। यह त्वचा और रंगों के बीच सुरक्षा कवच का काम करता है।



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